बिरसा हरित ग्राम योजना की बड़ी सफलता: रामगढ़ के 4 टन आम दुबई निर्यात के लिए रवाना

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रामगढ़, 05 जून: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में रामगढ़ जिले के दुलमी और गोला प्रखंड में उत्पादित 4 टन (4,000 किलोग्राम) आमों की खेप दुबई के अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए रवाना की गई।

समाहरणालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उपायुक्त ऋतुराज ने आम से लदे वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह आम ‘रामगढ़ झारखंड अम्रपाली’ ब्रांड नाम से वैश्विक बाजार में पहुंचेंगे। इस पहल को जिला प्रशासन, डीआरडीबी-मनरेगा टीम तथा मनोन्नति महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) के सहयोग से सफल बनाया गया है।

उपायुक्त ऋतुराज ने कहा कि जो भूमि कभी बंजर और अनुपयोगी मानी जाती थी, आज वही भूमि बिरसा हरित ग्राम योजना के माध्यम से किसानों की आय का मजबूत स्रोत बन रही है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और एफपीओ के तकनीकी मार्गदर्शन से किसानों ने पौधारोपण से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का सफर तय किया है, जो जिले के लिए गर्व की बात है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए आमों की उच्च स्तरीय ग्रेडिंग और आकर्षक पैकेजिंग की गई है, ताकि बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। अधिकारियों के अनुसार इस पहल से विशेष रूप से महिला किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और उन्हें सीधे वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

इस उपलब्धि पर लाभुक किसानों और मनोन्नति महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी की महिलाओं ने खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्य सरकार और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त आशीष अग्रवाल, प्रभारी पदाधिकारी (गोपनीय शाखा) रविंद्र कुमार गुप्ता, प्रभारी पदाधिकारी (सामान्य शाखा) रीना कुजूर, जिला योजना पदाधिकारी संतोष भगत, परियोजना पदाधिकारी अनुजा राणा, फणींद्र कुमार गुप्ता, अजीत कुमार, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी (मनरेगा) विजय कुमार समेत कई अधिकारी और महिला किसान मौजूद थीं।

बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बंजर भूमि पर विकसित बागवानी परियोजनाओं का यह परिणाम है कि अब रामगढ़ के किसानों की उपज स्थानीय बाजारों तक सीमित न रहकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पहचान बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जिले के अन्य किसानों को भी बागवानी और निर्यातोन्मुख खेती के लिए प्रेरणा मिलेगी।