नई दिल्ली, 21 जुलाई: देश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब एक राज्य में वैध रूप से पंजीकृत डॉक्टरों और नर्सों को दूसरे राज्य में कार्य करने के लिए अलग से पंजीकरण कराने या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्यों के बीच चिकित्सा पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाना और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश व सेवाओं का विस्तार करना है।
आंध्र प्रदेश इस तरह की व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की मेडिकल काउंसिल में वैध रूप से पंजीकृत एमबीबीएस डॉक्टर अब बिना अलग पंजीकरण के आंध्र प्रदेश में चिकित्सा सेवा दे सकेंगे। इसी प्रकार बिहार सरकार ने भी अध्यादेश के माध्यम से डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य संबद्ध स्वास्थ्यकर्मियों के लिए स्थानीय पंजीकरण और NOC की बाध्यता समाप्त कर दी है तथा ऑनलाइन स्व-प्रमाणन (Self-Certification) की व्यवस्था लागू की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से डॉक्टरों और नर्सों की उपलब्धता बढ़ेगी, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में नियुक्ति प्रक्रिया भी तेज होगी। यह पहल राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की उस सोच के अनुरूप है, जिसके तहत पूरे देश में चिकित्सा पेशेवरों के लिए अधिक सहज और एकीकृत पंजीकरण व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।