रांची, 30 मई: झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने राज्य की नदियों, तालाबों और बांधों को झारखंड की “जीवनरेखा” बताते हुए कहा है कि जलस्रोतों पर अतिक्रमण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जलाशयों को अतिक्रमण मुक्त कराने, उनकी सफाई सुनिश्चित करने और संरक्षण के लिए ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में जल संकट और बढ़ती गर्मी को देखते हुए जलस्रोतों का संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदियों, डैम और तालाबों पर अवैध कब्जा न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि आम लोगों के पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पर भी सीधा असर डालता है।
सरकार की ओर से संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को जलाशयों के आसपास हुए अतिक्रमण की पहचान कर अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। रांची सहित कई जिलों में डैम, तालाब और जल स्रोतों की जमीन पर कब्जे को लेकर पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने भी जलस्रोतों के अतिक्रमण और प्रदूषण पर चिंता जताते हुए सरकार से जवाब तलब किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी का भी विषय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नदियों और तालाबों को स्वच्छ रखने में सहयोग करें तथा अवैध कब्जों की जानकारी प्रशासन को दें। सरकार आने वाले दिनों में जल संरक्षण और सौंदर्यीकरण से जुड़े विशेष अभियान भी चलाएगी।