रांची, 15 जुलाई: झारखंड हाई कोर्ट ने रेल दुर्घटना से जुड़े एक अहम मामले में मृत यात्री के परिजनों को बड़ी राहत देते हुए रेलवे को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित होता है कि मृतक एक वैध यात्री था और उसकी मौत चलती ट्रेन से गिरने के कारण हुई, तो केवल टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
मामला देवघर जिले के मधुपुर निवासी स्वर्गीय अशोक मेहतो की मौत से जुड़ा है। उनकी पत्नी राजकुमारी देवी और चार बेटियों ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल, रांची में 8 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। हालांकि, 26 अप्रैल 2023 को ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि मामला रेलवे अधिनियम के तहत ‘अनटुवर्ड इंसीडेंट’ की श्रेणी में सिद्ध नहीं होता। इसके बाद मृतक के परिजनों ने इस फैसले को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी।
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पंचनामा और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि अशोक मेहतो की मौत रेल यात्रा के दौरान चलती ट्रेन से गिरने के कारण हुई थी।
हाई कोर्ट ने रेलवे को मृतक के आश्रितों को 8 लाख रुपये मुआवजा निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रेल दुर्घटना पीड़ितों को राहत देने के लिए बनाए गए कानून की व्याख्या मानवीय और कल्याणकारी दृष्टिकोण से की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिल सके।