रांची, 28 जून: झारखंड सरकार द्वारा अवैध रूप से निर्मित भवनों को वैध (रेग्युलराइज) करने के लिए शुरू की गई विशेष योजना की आवेदन अवधि समाप्त हो गई है। सरकार को जहां लाखों भवन मालिकों से आवेदन मिलने की उम्मीद थी, वहीं निर्धारित समयसीमा तक केवल करीब 4,500 आवेदन ही प्राप्त हुए। यह संख्या संभावित लाभार्थियों की तुलना में काफी कम मानी जा रही है।
राज्य सरकार ने मई 2026 में झारखंड अनधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली, 2026 के तहत ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया था। इस योजना के माध्यम से बिना स्वीकृत नक्शे के बने जी+2 (10 मीटर तक ऊंचाई) और 300 वर्गमीटर तक के भूखंड पर बने पात्र आवासीय भवनों को निर्धारित शुल्क और जुर्माने के साथ वैध बनाने का अवसर दिया गया था। आवेदन की समयसीमा 60 दिन निर्धारित की गई थी।
सरकार का अनुमान था कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में लगभग सात लाख भवन मालिक इस योजना से लाभान्वित हो सकते हैं। हालांकि आवेदन संख्या अपेक्षा से काफी कम रही। माना जा रहा है कि योजना की जानकारी आम लोगों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच सकी। इसके अलावा पात्रता संबंधी शर्तें, तकनीकी दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया और शुल्क को लेकर भी कई लोगों ने आवेदन नहीं किया।
विशेषज्ञों ने पहले ही नियमों में संशोधन की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि 300 वर्गमीटर भूखंड की सीमा के कारण बड़ी संख्या में भवन मालिक योजना के दायरे से बाहर रह गए, विशेषकर सीएनटी क्षेत्र के लोग।
अब प्राप्त आवेदनों की जांच संबंधित नगर निकायों और विभागीय अधिकारियों द्वारा की जाएगी। पात्र पाए जाने वाले भवनों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद वैध घोषित किया जाएगा। वहीं जिन लोगों ने आवेदन नहीं किया, उनके विरुद्ध भविष्य में नगर निकायों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।