प्रकृति एवं पर्यावरण का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी : हेमंत सोरेन

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रांची, 12 अगस्त: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि प्रकृति एवं पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ विकास का संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां के जंगल, पहाड़, नदियां और जलस्रोत राज्य की पहचान के साथ-साथ लाखों लोगों की आजीविका का आधार भी हैं। ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग जिम्मेदारी और सतत विकास की सोच के साथ किया जाना आवश्यक है। सरकार का प्रयास है कि विकास की प्रक्रिया में पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पौधरोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों को वृक्ष बनने तक उनकी देखभाल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

हेमंत सोरेन ने पर्यावरण संरक्षण को जन-अभियान बनाने पर जोर देते हुए कहा कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। जंगलों के संरक्षण से जैव विविधता सुरक्षित रहती है और जल स्रोतों का अस्तित्व भी बना रहता है। इसलिए पर्यावरण के प्रति जागरूकता घर से लेकर विद्यालय, पंचायत और समाज के हर स्तर तक पहुंचाने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आम लोगों से प्लास्टिक के कम इस्तेमाल, स्वच्छता बनाए रखने, जल संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहयोग करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी और स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराना हम सभी का दायित्व है। सरकार के प्रयास तभी सफल होंगे, जब आम नागरिक भी पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझकर इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।