रांची, 04 जून: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में मीडिया के प्रवेश और रिपोर्टिंग पर नई पाबंदियों को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। रिम्स प्रशासन द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब किसी भी पत्रकार या मीडिया संस्थान को अस्पताल परिसर में रिपोर्टिंग, फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी करने से पहले निदेशक, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट अथवा अतिरिक्त मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
रिम्स प्रशासन का कहना है कि यह कदम मरीजों की गोपनीयता, सुरक्षा और अस्पताल की सेवाओं में अनावश्यक व्यवधान रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रशासन के अनुसार बिना अनुमति कैमरा और रिकॉर्डिंग उपकरणों के साथ संवेदनशील वार्डों में प्रवेश से मरीजों की निजता प्रभावित होती है तथा चिकित्सा कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर हमला बोला है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि रिम्स में व्याप्त अव्यवस्था, वित्तीय संकट और स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर होने से रोकने के लिए मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की होती है तथा ऐसे कदम पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं।
विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब रिम्स में वेतन भुगतान, आधारभूत संरचना और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पहले से ही चर्चाएं चल रही हैं। हाल के दिनों में कर्मचारियों द्वारा वेतन भुगतान में देरी को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी किया गया था।
उधर स्वास्थ्य विभाग और रिम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि अस्पताल के सुचारु संचालन और मरीजों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। प्रशासन ने कहा है कि अधिकृत अनुमति के बाद मीडिया को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाती रहेगी।
बहरहाल, रिम्स में मीडिया प्रवेश पर लगी नई शर्तों ने झारखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने के आसार हैं।