झारखंड में मतदाता सूची पर विवाद गहराया: 30% नामों में गड़बड़ी का आरोप, लाखों आदिवासी मतदाताओं के प्रभावित होने की आशंका

Spread the News

रांची, 20 जुलाई: झारखंड में विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR-2026) के बीच मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दलों और आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया है कि राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम, पते और पारिवारिक विवरण में त्रुटियां पाई गई हैं। उनका दावा है कि लगभग 30 प्रतिशत प्रविष्टियों में किसी न किसी प्रकार की गड़बड़ी है, जिससे विशेष रूप से आदिवासी समुदाय के लाखों मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इस 30% आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

आरोप है कि कई स्थानों पर मतदाताओं के नाम गलत दर्ज हैं, परिवार के सदस्यों को अलग-अलग मतदान केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है तथा कुछ मामलों में मतदाताओं का विवरण अधूरा पाया गया है। आदिवासी संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते इन त्रुटियों का समाधान नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

वहीं, भारत निर्वाचन आयोग और झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी वास्तविक और पात्र मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा। आयोग के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। इसके तहत 30 जून से 29 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं तथा 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जिसके बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।

निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे BLO द्वारा दिए गए गणना प्रपत्र को समय पर भरकर जमा करें और यदि उनके नाम या विवरण में कोई त्रुटि हो तो निर्धारित अवधि में दावा एवं आपत्ति दर्ज कराएं। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले सभी वैध आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा।