रामगढ़, 04 जून: राधागोविन्द इंटर कॉलेज, रामगढ़ में संस्कृत भारती झारखंड द्वारा आयोजित सप्तदिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का उद्घाटन राँची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की ध्वजवाहिका है तथा वर्तमान समय में जीवन मूल्यों के क्षरण के दौर में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के ज्ञान के बिना प्राचीन भारतीय ज्ञान, विज्ञान, कला, इतिहास एवं अन्य शास्त्रों में प्रवीणता प्राप्त करना संभव नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समाहित भारतीय ज्ञान परंपरा नई पीढ़ी के अध्ययन को सशक्त आधार प्रदान करेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत भारती झारखंड के अध्यक्ष डॉ. ताराकान्त शुक्ल ने कहा कि वर्ष 1981 में पद्मश्री कृष्ण शास्त्री, डॉ. विश्वास तथा डॉ. जनार्दन हेगड़े द्वारा स्थापित संस्कृत भारती आज वटवृक्ष का रूप धारण कर चुकी है। उन्होंने कहा कि संगठन न केवल भारत बल्कि विश्व के लगभग 30 देशों में संस्कृत के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रहा है। नई पीढ़ी में संस्कृत अध्ययन के प्रति बढ़ती रुचि सुखद संकेत है।
संस्कृत भारती झारखंड के उपाध्यक्ष डॉ. दीपचन्द कश्यप ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि संगठन ने झारखंड के सुदूर क्षेत्रों तक पहुंच बनाकर आम जनमानस को संस्कृत से जोड़ने का कार्य किया है। वहीं प्रदेश विद्यालय प्रमुख डॉ. सुनील कुमार कश्यप ने संस्कृत भारती का परिचय देते हुए बताया कि वर्ष 1995-96 में वे अकेले प्रशिक्षण लेने दिल्ली गए थे, जबकि आज झारखंड में हजारों लोग संस्कृत संभाषण करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत सहित विश्व के 27 देशों में इस प्रकार के संस्कृत संभाषण वर्ग संचालित हो रहे हैं।
संस्कृत भारती झारखंड के प्रांत संरक्षक गोविन्द मेवाड़ ने कहा कि संस्कृत हमारी संस्कृति की आधारशिला है और इसके अध्ययन से नई पीढ़ी सुसंस्कृत होकर जीवन को सही दिशा दे सकेगी। विशिष्ट अतिथि साँवरमल अग्रवाल ने कहा कि जीवन मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए संस्कृत का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर संस्कृत भारती झारखंड के न्यासी ओमप्रकाश गुप्त एवं सत्येन्द्र गुप्त ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में शिक्षक प्रमुख विनय कुमार पांडेय, प्रांत मंत्री पृथ्वीराज सिंह, रमेश कुमार सिंह, डॉ. राम प्यारे मिश्रा, डॉ. राहुल कुमार, ज्ञान ब्रह्म पाठक एवं डॉ. संजय कुमार सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
अतिथियों का स्वागत संस्कृत भारती के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन मिश्र तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शैलेश मिश्र ने किया। शिविर में 150 प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं।