कोलकाता, 26 मई: ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रही है। राज्य की विभिन्न नगरपालिकाओं से TMC के 101 से अधिक पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
बताया जा रहा है कि उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना समेत कई नगर निकायों में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों से स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। कई जगहों पर पार्षदों ने चुनावी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा, जबकि कुछ नेताओं ने पार्टी संगठन में उपेक्षा और भ्रष्टाचार के आरोपों को कारण बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद TMC के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ा है। कई पार्षदों और स्थानीय नेताओं के भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। हाल के दिनों में पार्टी के विरोध प्रदर्शनों में भी अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी, जिससे संगठनात्मक कमजोरी उजागर हुई है।
सूत्रों के अनुसार, इस्तीफों का सिलसिला सात से अधिक नगरपालिकाओं तक पहुंच चुका है। राज्य सरकार ने कई नगर निकायों में प्रशासनिक कामकाज बाधित न हो, इसके लिए प्रशासकों की नियुक्ति शुरू कर दी है।
वहीं, ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं और पार्षदों से एकजुट रहने की अपील की है। हालांकि लगातार हो रहे इस्तीफों ने यह संकेत दे दिया है कि चुनावी हार के बाद TMC को संगठन बचाने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।