दिल्ली में आज जुटेगा विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली

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एसआईआर और कथित वोट चोरी के विरोध में INDIA गठबंधन का बड़ा आयोजन, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे नेतृत्व; झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन भी होंगे शामिल

नई दिल्ली/रांची, 01 नवंबर: देश की राजनीति में आज यानी 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी दलों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलेगा। INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे। रैली का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी करेंगे।

इस महारैली का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर केंद्र सरकार तथा निर्वाचन आयोग के खिलाफ आवाज उठाना है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी उठा रहे हैं।

इस महारैली में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी शामिल होंगे। दोनों के 30 अक्टूबर को ही विशेष विमान से दिल्ली रवाना होने की जानकारी सामने आई थी। झारखंड कांग्रेस की ओर से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के दिल्ली पहुंचने की तैयारी की गई है। पार्टी नेताओं के अनुसार, झारखंड से करीब 12 हजार कार्यकर्ताओं के रैली में शामिल होने की संभावना है।

दिल्ली कांग्रेस ने महारैली की तैयारियों के लिए 20 समितियों का गठन किया है। मंच, सुरक्षा, पार्किंग, पेयजल, आवास, मीडिया प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी अलग-अलग समितियों को सौंपी गई है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने की संभावना जताई है। इसके लिए विभिन्न राज्यों से आने वाले कार्यकर्ताओं के परिवहन की व्यवस्था भी की गई है।

एसआईआर और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव लगातार तेज हो रहा है। विपक्ष जहां इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा की लड़ाई बता रहा है, वहीं भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए एसआईआर को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया बताया है।

महारैली को विपक्षी एकजुटता के प्रदर्शन के साथ-साथ आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें रामलीला मैदान में जुटने वाली भीड़ और विपक्षी नेताओं के संबोधन पर टिकी हैं।