नई दिल्ली/रांची, 02 नवंबर: राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को इंडिया गठबंधन की ओर से आयोजित ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी भाग लिया। इस महारैली में देशभर के विपक्षी दलों के नेताओं और हजारों समर्थकों ने हिस्सा लिया। झारखंड से भी बड़ी संख्या में नेताओं, मंत्रियों, कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ 30 अक्टूबर को ही विशेष विमान से दिल्ली रवाना हुए थे। रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत इंडिया गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
महारैली का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे को उठाना था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इंडिया गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की गई।
झारखंड से कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों नेताओं ने रांची से कार्यकर्ताओं को लेकर जाने वाली बसों को रवाना किया था। कांग्रेस की ओर से दावा किया गया था कि राज्य से लगभग 12 हजार कार्यकर्ता महारैली में शामिल होंगे। टाना भगत समुदाय, आदिवासी प्रतिनिधियों और सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी भी इस कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।
एसआईआर का मुद्दा झारखंड की राजनीति में भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने 25 और 26 नवंबर को झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी की है। इसमें एसआईआर प्रक्रिया के अलावा खनिज क्षेत्र से जुड़े कानून में संशोधन के प्रभावों पर भी चर्चा प्रस्तावित है।
दिल्ली की इस महारैली में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी को इंडिया गठबंधन की एकजुटता और झारखंड की राजनीतिक भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष ने इस मंच के माध्यम से मताधिकार, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान की रक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।