मेरठ, 15 अक्टूबर: पति सौरभ राजपूत की हत्या कर शव को नीले ड्रम में सीमेंट से छिपाने के चर्चित मामले में मेरठ की अदालत ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को बड़ा फैसला सुनाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोनों पर जुर्माना भी लगाया। सजा सुनाए जाने के दौरान मुस्कान ने अपनी बच्चियों का जिक्र करते हुए उनके ध्यान रखने की बात कही।
मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड ने मार्च 2025 में पूरे देश का ध्यान खींचा था। सौरभ मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे और लंदन में रहते थे। वह फरवरी 2025 में अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए मेरठ लौटे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उनकी पत्नी मुस्कान और साहिल ने मिलकर उनकी हत्या की साजिश रची थी।
पुलिस की जांच के मुताबिक, मार्च 2025 में सौरभ को नशीला पदार्थ देने के बाद धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद शव के टुकड़े कर उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट से ढक दिया गया, ताकि घटना के साक्ष्य छिपाए जा सकें।
मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और 22 गवाहों की गवाही के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी करार दिया था। सजा पर फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी।
बुधवार को दोनों दोषियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हत्या के मामले में प्रत्येक पर 50 हजार रुपये और साक्ष्य मिटाने से संबंधित अपराध में 20 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया।
फैसले के दौरान मुस्कान ने अपनी बच्चियों का जिक्र करते हुए उनके भविष्य और देखभाल को लेकर बात कही। रिपोर्टों में उसके हवाले से बच्चियों का ध्यान रखने की गुहार का उल्लेख किया गया है। इस मामले में मुस्कान की पारिवारिक जिंदगी, सौरभ की हत्या और शव को छिपाने के तरीके ने इसे देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया था।
सौरभ के परिजनों ने शुरू से ही दोनों दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी। अदालत के फैसले के साथ ही मामले में निचली अदालत की सजा संबंधी कार्यवाही पूरी हुई। मृत्युदंड के मामलों में कानून के अनुसार हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है।