रामगढ़, 01 अक्टूबर: नमामि गंगे योजना के तहत शून्य बजट प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को रामगढ़ में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जिले के सभी प्रखंडों से 65 किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को कम लागत, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धति के प्रति जागरूक करना था।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान सह वरीय वैज्ञानिक शुधांशु शेखर ने किसानों को शून्य बजट प्राकृतिक खेती की तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इसके चार प्रमुख घटकों बीजामृत, जीवामृत, मल्चिंग और वाफसा के प्रयोग की विधि, उपयोगिता और कृषि में महत्व समझाया।
आत्मा, रामगढ़ के उप परियोजना निदेशक संजय कुमार मंडल ने कहा कि प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद, कीटनाशक और महंगे बाहरी कृषि इनपुट पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस पद्धति में कम लागत और कम पानी की खपत के साथ देसी गाय आधारित कृषि प्रणाली को बढ़ावा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य में सुधार के साथ खेती की लागत तथा किसानों पर कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और फसल की गुणवत्ता बनाए रखने में भी यह पद्धति उपयोगी हो सकती है।
कार्यशाला के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याएं और जिज्ञासाएं विशेषज्ञों के समक्ष रखीं। शुधांशु शेखर ने किसानों के सवालों का समाधान करते हुए आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए। कार्यक्रम में जिला परियोजना पदाधिकारी, नमामि गंगे चंदन कुमार सहित संबंधित पदाधिकारी और 65 किसान मौजूद रहे।