रांची, 31 अगस्त: झारखंड में माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियुक्ति परीक्षा से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। विज्ञापन संख्या 2/2025 के तहत करीब 2,800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराए जाने के मामले में अदालत ने आपराधिक जांच के निर्देश दिए हैं। जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को प्राथमिकी दर्ज कराने तथा पूरे मामले की सीआईडी से विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है।
मामला प्लस-टू विद्यालयों में 23 विषयों के 1,373 माध्यमिक आचार्य पदों पर नियुक्ति से जुड़ा है। भर्ती परीक्षा में करीब 25 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें लगभग 2,800 अभ्यर्थियों के परीक्षा देने वाले कंप्यूटर सिस्टम में बाहरी हस्तक्षेप अथवा कथित छेड़छाड़ की जानकारी सामने आने के बाद उनकी उत्तर-पुस्तिकाओं को लॉक कर दिया गया था। इसके बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने संबंधित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर दोबारा परीक्षा लेने का निर्णय लिया था।
करीब 2,800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा के फैसले को अर्पणा कुमारी समेत अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि एक बार परीक्षा आयोजित होने के बाद केवल कुछ अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा लेना उचित नहीं है। इससे सभी परीक्षार्थियों के साथ समान व्यवहार का सवाल उठता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने भी सवाल उठाया कि यदि परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सिस्टम में बाहरी हस्तक्षेप या हैकिंग हुई थी, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि केवल प्रभावित बताए गए अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराने का आधार क्या था।
हाईकोर्ट ने JSSC को निर्देश दिया है कि दोबारा परीक्षा देने वाले करीब 2,800 अभ्यर्थियों के पहली परीक्षा में प्राप्त अंक भी प्रकाशित किए जाएं। अदालत ने कहा कि यदि सीआईडी जांच में इन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आता है और वे निर्धारित मेरिट में आते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर भी विचार किया जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीआईडी जांच में सामने आने वाले तथ्यों का प्रभाव नियुक्ति प्रक्रिया और परिणाम पर पड़ सकता है। यदि जांच में JSSC का कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इस आदेश के बाद माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियुक्ति परीक्षा की पूरी प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई है। अब सीआईडी जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कंप्यूटर सिस्टम में कथित बाहरी हस्तक्षेप की वास्तविक वजह क्या थी और दोबारा परीक्षा कराने का आधार कितना ठोस था।