पटना, 4 अप्रैल 2026: बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित शिक्षकों की नौकरियों पर गहरा संकट मंडरा रहा है। प्रमाण-पत्रों की सख्त जांच में बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें फर्जी डिग्री, मार्कशीट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले सैकड़ों शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने की तैयारी चल रही है। सहरसा समेत कई जिलों में चल रही वेरिफिकेशन प्रक्रिया में फर्जी प्रमाण-पत्रों का जाल उजागर हो रहा है, जिससे शिक्षा माफिया का पूरा नेटवर्क भी सामने आने वाला है।
शिक्षा विभाग और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की संयुक्त जांच में अब तक दर्जनों मामले सामने आए हैं, जहां BPSC TRE के चयनित अभ्यर्थियों ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण-पत्र जमा किए थे। प्रारंभिक जांच में हर प्रखंड से 2 से 4 फर्जी शिक्षक पकड़े जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सहरसा जिले में BPSC से चयनित कई शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं, जिनकी जांच तेज कर दी गई है। फर्जी पाए जाने पर उनकी सेवा तत्काल समाप्त कर दी जाएगी और अब तक प्राप्त वेतन की ब्याज सहित वसूली भी की जाएगी।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह घोटाला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा माफिया का संगठित नेटवर्क इसमें शामिल है। फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह, गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से सर्टिफिकेट जारी कराने वाले एजेंट और भर्ती प्रक्रिया में सेटिंग करने वाले लोग इस पूरे रैकेट के हिस्से हैं। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जांच आगे बढ़ने पर माफिया के बड़े राज खुलेंगे। कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जुड़े लोग भी इसमें फंस सकते हैं।”
बिहार में पिछले कुछ वर्षों में BPSC TRE-1, TRE-2 और TRE-3 के माध्यम से हजारों शिक्षकों की बहाली हुई है, लेकिन दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ियां लगातार सामने आ रही हैं। पहले चरण और दूसरे चरण में चयनित हजारों शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच चल रही है। कुछ रिपोर्ट्स में 24 हजार तक शिक्षकों की नौकरियां संकट में बताई जा रही हैं, जबकि फर्जी डिग्री वाले 4 हजार से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है। नियोजित शिक्षकों के पुराने मामलों में भी 2953 शिक्षकों के खिलाफ 1748 FIR दर्ज हो चुकी हैं।
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रमाण-पत्रों की जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपें। अगर कोई शिक्षक फर्जी पाया गया तो न केवल नौकरी जाएगी, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी होगी। विपक्षी दलों ने इस घोटाले को लेकर सरकार पर हमला बोल दिया है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे घोटालों से न केवल योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जा रहा है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। बिहार सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि फर्जीवाड़े पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
जांच में क्या सामने आ रहा है?
• फर्जी शैक्षणिक डिग्री और मार्कशीट
• CTET में 60% अंक की शर्त पूरी न करने के बावजूद चयन
• जाति, विकलांगता और खेल कोटा में फर्जी प्रमाण-पत्र
• एक ही सत्र में दो डिग्री हासिल करने जैसे गंभीर उल्लंघन
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सैकड़ों शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हो सकती हैं और शिक्षा माफिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जाएगी। यह प्रक्रिया बिहार की शिक्षा व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, हालांकि इससे प्रभावित शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है।