राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में यूनियन बजट 2026 पर विश्लेषण कार्यक्रम आयोजित

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रामगढ़, 02 फरवरी 2026 : राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय ने सोमवार को यूनियन बजट 2026 का गहन विश्लेषण किया। इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने बजट के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए और इसे भारत की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में प्रबंधन विभाग की छात्रा श्वेता कुमारी, रोजी परवीन और संजीत कुमार तथा वाणिज्य विभाग की सृष्टि, पुण्य और मुस्कान ने बजट पर विस्तृत चर्चा की। कुलाधिपति बी एन साह ने कहा कि यूनियन बजट 2026 भारत को आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बजट को युवा शक्ति-प्रेरित और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देने वाला बताया।

सचिव प्रियंका कुमारी ने बजट में महिलाओं को दी गई प्रमुखता पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता से जुड़ी योजनाओं का जिक्र किया, जैसे हर जिले में लड़कियों के लिए हॉस्टल और महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस।

कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बजट 2026 में शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल नवाचार और युवा सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाया गया है, जिसमें स्किलिंग, AI-सक्षम लर्निंग और रोजगार से जुड़ी पहलें शामिल हैं।

कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल ने बजट को शिक्षा और विकास को मजबूती देने वाला करार दिया। संकायाध्यक्ष डॉ. रंजन कुमार ने बताया कि बजट की जानकारी होना सभी छात्र-छात्राओं के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और व्यक्तिगत करियर से सीधे जुड़ा है।

कार्यक्रम का संचालन मो. रिजवान नूरी ने किया। विभाग के उदय प्रसाद ने छात्रों को बजट की मुख्य विशेषताओं की जानकारी दी, जबकि डॉ. रचिता ने झारखंड के संदर्भ में बजट के प्रभाव पर अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन अनिल कुमार केशरी ने किया।

मौके पर वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, प्रबंधन विभाग के डॉ. प्रशांत कुमार, कुंदन कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

यह कार्यक्रम छात्रों में बजट जागरूकता बढ़ाने और आर्थिक नीतियों की समझ विकसित करने में सहायक सिद्ध हुआ।