लखनऊ: भारतीय सेना को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द करने से इनकार करते हुए राहुल की याचिका खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला बनता है और निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश कानून के दायरे में है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि समन को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने यह आदेश 29 मई को खुली अदालत में याचिका खारिज करते हुए सुनाया था, जिसका विस्तृत निर्णय 2 जून को सार्वजनिक किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी द्वारा भारतीय सेना को लेकर की गई एक टिप्पणी को लेकर लखनऊ की एक अदालत में परिवाद दर्ज कराया गया था। शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि राहुल की टिप्पणी अपमानजनक थी और इससे सेना की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। इस आधार पर निचली अदालत ने 11 फरवरी को राहुल गांधी को समन जारी किया था।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने कथित रूप से यह बयान दिया था कि “चीनी सैनिक भारतीय जवानों की पिटाई करते हैं, लेकिन इस पर कोई सवाल नहीं उठाता।” इसी बयान को आधार बनाकर मानहानि की कार्यवाही शुरू की गई थी।
अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।
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राहुल गांधी को सेना पर टिप्पणी मामले में हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, समन आदेश पर रोक से इनकार
लखनऊ: भारतीय सेना को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द करने से इनकार करते हुए राहुल की याचिका खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला बनता है और निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश कानून के दायरे में है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि समन को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने यह आदेश 29 मई को खुली अदालत में याचिका खारिज करते हुए सुनाया था, जिसका विस्तृत निर्णय 2 जून को सार्वजनिक किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि यह है कि कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी द्वारा भारतीय सेना को लेकर की गई एक टिप्पणी को लेकर लखनऊ की एक अदालत में परिवाद दर्ज कराया गया था। शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि राहुल की टिप्पणी अपमानजनक थी और इससे सेना की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। इस आधार पर निचली अदालत ने 11 फरवरी को राहुल गांधी को समन जारी किया था।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने कथित रूप से यह बयान दिया था कि “चीनी सैनिक भारतीय जवानों की पिटाई करते हैं, लेकिन इस पर कोई सवाल नहीं उठाता।” इसी बयान को आधार बनाकर मानहानि की कार्यवाही शुरू की गई थी।
अब हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।
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