राहुल गांधी ने भगवान राम को बताया ‘पौराणिक पात्र’, बीजेपी ने बताया ‘हिंदू विरोधी’; कांग्रेस ने किया बचाव

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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में एक चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भगवान श्रीराम को ‘पौराणिक पात्र’ कहकर संबोधित किया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी ने कांग्रेस पर हिंदू विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया है।

राहुल गांधी का बयान

ब्राउन यूनिवर्सिटी के वॉटसन इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी से पूछा गया कि “हिंदू राष्ट्रवाद के दौर में धर्मनिरपेक्ष राजनीति कैसे संभव है?” इसके जवाब में राहुल ने कहा:

“हमारे पौराणिक पात्र, जैसे भगवान राम, करुणामय और क्षमाशील थे। मैं बीजेपी की सोच को हिंदुत्व नहीं मानता। मेरे लिए असली हिंदू विचार बहुलतावादी, सहिष्णु और प्रेमपूर्ण है।”

राहुल ने आगे कहा कि बीजेपी एक “फ्रिंज ग्रुप” (किनारे की सोच वाली पार्टी) है, जो भारत की मुख्यधारा की सोच का प्रतिनिधित्व नहीं करती। उन्होंने भारत के समाज सुधारकों को कट्टरता से दूर बताया और बीजेपी की विचारधारा पर सवाल खड़े किए।

बीजेपी का तीखा हमला

राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी ने तुरंत पलटवार किया।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा:

“राम का अस्तित्व नकारने वाली कांग्रेस अब उन्हें पौराणिक पात्र कह रही है। यही पार्टी राम मंदिर निर्माण का विरोध कर चुकी है और ‘हिंदू आतंक’ जैसी अवधारणा गढ़ चुकी है।”

प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस चुनावों के समय सनातन प्रेम का ढोंग करती है जबकि उसका वास्तविक चेहरा राम विरोधी है।

सीआर केसवन ने 2007 के यूपीए सरकार के उस हलफनामे की याद दिलाई जिसमें सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि राम के अस्तित्व का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।

कांग्रेस का जवाब

कांग्रेस ने राहुल गांधी के बयान का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है।

पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा:

“राहुल गांधी ने भगवान राम के करुणा और क्षमा जैसे गुणों की बात की थी। बीजेपी उनकी बात को गलत ढंग से पेश कर हिंदू भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रही है।”

राहुल गांधी के बयान ने एक बार फिर धर्म, राजनीति और विचारधारा की बहस को हवा दे दी है। जहां बीजेपी इसे कांग्रेस की हिंदू विरोधी सोच का प्रतीक बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे बहुलतावादी विचारधारा का समर्थन और बीजेपी की कट्टरता पर सवाल बता रही है।