रांची, 07 नवंबर: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा नियुक्तियां रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। इस फैसले से नियुक्ति रद्द किए जाने से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने 6 नवंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। अदालत ने 18 अगस्त 2026 को जारी सरकार की अधिसूचना को निरस्त करते हुए कहा कि अधूरी जांच के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करना उचित नहीं है।
अदालत के अनुसार, विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत चयनित अभ्यर्थियों की सेवाएं निरंतर मानी जाएंगी। उन्हें भर्ती रद्द करने की अधिसूचना के कारण सेवा संबंधी लाभों से भी वंचित नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ अलग-अलग कार्रवाई की जा सकती है। कुछ लोगों पर लगे आरोपों के आधार पर सभी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है।
हालांकि, कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं की जांच जारी रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। चयनित अभ्यर्थियों को भी जांच में सहयोग करना होगा।
हाईकोर्ट के इस फैसले से झारखंड के करीब 1932 चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी बरकरार रहने का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता झेल रहे अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है।