IAS पूजा सिंघल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, मनी लॉन्ड्रिंग केस में जारी रहेगा ट्रायल

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नई दिल्ली/रांची 26 सितंबर: झारखंड कैडर की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान पूजा सिंघल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि तत्कालीन सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 197 के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में अपना पक्ष रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अभियोजन की मंजूरी के सवाल पर अंतिम फैसला नहीं दिया और इसे आगे की कार्यवाही के दौरान अन्य साक्ष्यों के साथ तय किए जाने के लिए खुला रखा। अदालत ने तत्काल कोई राहत देने से इनकार किया।

पूजा सिंघल को ईडी ने 11 मई 2022 को मनरेगा के क्रियान्वयन में कथित करीब 18 करोड़ रुपये की अनियमितता से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान ईडी ने कई स्थानों पर छापेमारी की थी और करीब 19.76 करोड़ रुपये नकद समेत दस्तावेज व डिजिटल उपकरण बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

रांची की पीएमएलए अदालत ने 19 जुलाई 2022 को मामले में संज्ञान लिया था। पूजा सिंघल ने इस संज्ञान आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

पूजा सिंघल को दिसंबर 2024 में विशेष पीएमएलए अदालत से जमानत मिली थी। जमानत के बाद झारखंड सरकार ने उनका निलंबन समाप्त कर उन्हें सेवा में बहाल किया था।