रांची, 24 सितंबर: झारखंड में लगातार बदल रहे मौसम और बारिश की संभावना को देखते हुए राज्य के प्रमुख जलप्रपातों में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बारिश के दौरान जलप्रपातों में पानी का बहाव अचानक बढ़ने, चट्टानों पर फिसलन और वज्रपात का खतरा बना रहता है। ऐसे में लोगों से जलधारा के बेहद करीब नहीं जाने और प्रशासन की चेतावनी का पालन करने की अपील की जा रही है।
राज्य के हुंडरू, दशम, जोन्हा, सीता, हिरनी, पंचघाघ, पेरवाघाघ, लोध (बूढ़ा घाघ), घाघरी, उसरी, सदनी, केलाघाघ और भेलवाघाघ जैसे प्रमुख जलप्रपात बारिश के मौसम में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। हालांकि, खराब मौसम में इन स्थानों पर प्राकृतिक परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।
विशेषकर जलप्रपातों के नीचे बने जलकुंड, नदी की धाराओं और चट्टानी क्षेत्रों में अचानक पानी बढ़ने का खतरा रहता है। बारिश के दौरान चट्टानों पर काई और पानी के कारण फिसलन भी बढ़ जाती है। इसलिए पर्यटकों को सेल्फी या फोटो लेने के लिए जोखिम वाले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
प्रशासन की अपील है कि मौसम खराब होने पर जलप्रपातों का रुख न करें। यदि किसी पर्यटन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रवेश प्रतिबंधित किया जाता है, तो उसका पालन करें। बच्चों को जलधारा से दूर रखें और तेज बारिश या गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों एवं पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
बारिश के बीच झारखंड के जलप्रपातों का प्राकृतिक सौंदर्य जरूर मनमोहक हो जाता है, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मौसम सामान्य होने के बाद ही पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना उचित होगा।