अभय तिवारी के भाई और पत्नी पर भी शिकंजा, JPSC-JSSC-CGL में नौकरी पाने के तरीके की जांच

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रांची, 19 अगस्त: झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग ने मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी के परिवार तक जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जांच एजेंसी ने अभय तिवारी के सगे भाई अक्षय तिवारी और उसकी पत्नी से पूछताछ की है। दोनों की सरकारी नौकरी में नियुक्ति को लेकर भी जांच की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों को JSSC-CGL परीक्षा के माध्यम से सरकारी सेवा में चयन मिला था।

जांच में सामने आया है कि अक्षय तिवारी की नियुक्ति महिला एवं बाल विकास विभाग में हुई थी और बाद में उसकी प्रतिनियुक्ति बाल संरक्षण विभाग में की गई। वहीं, उसकी पत्नी सुषमा पांडेय का चयन JSSC-CGL के जरिए मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर हुआ था। CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों की नियुक्ति सामान्य चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी या कथित परीक्षा अनियमितताओं से इसका कोई संबंध था। हालांकि, अभी जांच पूरी नहीं हुई है और आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।

अभय तिवारी स्वयं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। जांच एजेंसी के अनुसार, वह पहले परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम कर चुका था। बाद में उसका चयन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुआ और वह गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था। CID के अनुसार उसने कई प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण की थीं और अब इन परीक्षाओं में उसकी भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसी को संदेह है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के जरिए अभय तिवारी ने खुद के साथ-साथ अपने करीबी लोगों को भी सरकारी नौकरी दिलाने में भूमिका निभाई हो सकती है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में OMR शीट से छेड़छाड़, अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने और कथित तौर पर नौकरी के लिए लेन-देन जैसे आरोपों की जांच चल रही है।

CID ने मामले में कई स्थानों पर छापेमारी कर दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक संबंधी कागजात और परीक्षा से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच एजेंसी अब इन सामग्रियों और संदिग्ध लेन-देन की तकनीकी एवं फॉरेंसिक जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जिसकी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले ने झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठन पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं। फिलहाल CID की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा नए खुलासे होने की संभावना बनी हुई है।