रांची, 09 अगस्त: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड में रविवार को झारखंड आदिवासी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव को लेकर राजधानी सहित राज्यभर में उत्साह का माहौल है। आयोजन के माध्यम से झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा, कला और विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि झारखंड की धरती ने दुनिया को ऐसा जीवन दर्शन दिया है, जहां प्रकृति पूजनीय है, समुदाय सर्वोपरि है और संस्कृति जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आदिवासी महोत्सव केवल आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अपने अस्तित्व, अस्मिता और अधिकारों के प्रति संकल्प को दोहराने का अवसर भी है। आदिवासी समाज की पहचान उसकी परंपराओं और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध से जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन तथा अपनी पहचान की रक्षा की लड़ाई आदिवासी समाज की विरासत रही है। आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आयोजित महोत्सव में आदिवासी कला-संस्कृति की विभिन्न विधाओं को मंच मिलेगा। पारंपरिक नृत्य, संगीत, लोककला और जनजातीय जीवनशैली से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से झारखंड की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि झारखंड अपनी विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ‘अबुआ दिशुम, अबुआ राज—अबुआ पहचान के साथ, अबुआ भविष्य की ओर’ के संदेश के साथ आदिवासी समाज की अस्मिता, अधिकार और विरासत के संरक्षण का संकल्प दोहराया।