बिहार में कम उम्र में मातृत्व की बढ़ती चुनौती: हर 10 में से एक मां नाबालिग

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पटना, 01 जून: बिहार में किशोरियों के बीच कम उम्र में मातृत्व का मामला चिंता का विषय बनता जा रहा है। हालिया स्वास्थ्य सर्वेक्षणों और अध्ययनों से पता चला है कि राज्य में मां बनने वाली युवतियों में बड़ी संख्या नाबालिग लड़कियों की है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में लगभग हर 10 में से एक युवती 18 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले ही मां बन रही है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह, शिक्षा की कमी, गरीबी तथा प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता का अभाव इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल रही है, जहां कम उम्र में विवाह और गर्भधारण की परंपरा अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में गर्भधारण से एनीमिया, कुपोषण, समय से पूर्व प्रसव और नवजात शिशु की मृत्यु जैसी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कम उम्र में मां बनने वाली लड़कियों की शिक्षा बाधित होती है, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

सरकार द्वारा बाल विवाह रोकने, किशोरियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान, स्कूलों में स्वास्थ्य शिक्षा तथा लड़कियों के सशक्तीकरण पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि बाल विवाह पर प्रभावी रोक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तो किशोर गर्भधारण के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। यह न केवल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए बल्कि राज्य के समग्र सामाजिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।