JTET भाषा विवाद सुलझाने वाली कमेटी में दो नए मंत्री शामिल, सरकार ने बढ़ाई कवायद

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रांची, 29 मई: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित मंत्रिस्तरीय कमेटी में अब दो नए मंत्रियों को भी शामिल किए जाने की चर्चा तेज हो गई है। सरकार भाषा विवाद पर व्यापक सहमति बनाने और सभी क्षेत्रों की भाषाई मांगों को संतुलित करने की कोशिश में जुटी है।

दरअसल, JTET नियमावली में भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को शामिल नहीं किए जाने के बाद राज्य के कई हिस्सों में विरोध शुरू हो गया था। विशेषकर पलामू, गढ़वा और संताल परगना क्षेत्र में स्थानीय संगठनों और छात्रों ने इसे लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री Hemant Soren के निर्देश पर पांच मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई थी।

कमेटी के संयोजक वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर बनाए गए थे। इसके अलावा मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव, योगेंद्र प्रसाद और सुदिव्य कुमार को सदस्य बनाया गया था। कमेटी को जिलावार भाषाई स्थिति की समीक्षा कर सरकार को सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, विवाद लगातार बढ़ने और अलग-अलग क्षेत्रों से नई मांगें आने के बाद अब कमेटी का दायरा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि आदिवासी, क्षेत्रीय और अल्पसंख्यक भाषाओं से जुड़े सभी पक्षों की राय लेकर अंतिम फैसला किया जाए। इसी वजह से दो और मंत्रियों को कमेटी में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

बताया जा रहा है कि कमेटी की हालिया बैठकों में भी भोजपुरी, मगही और अंगिका को लेकर सदस्यों के बीच मतभेद सामने आए थे। कुछ मंत्री इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ का मानना है कि केवल झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जा सकता है।

सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों और राज्य की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए संतुलित फैसला लिया जाएगा, ताकि JTET परीक्षा को लेकर किसी प्रकार का भ्रम या असंतोष न रहे।