राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित, झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन को मिला राष्ट्रीय गौरव
नई दिल्ली/रांची, 26 मई : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया। सोमवार को द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित भव्य समारोह में वर्ष 2026 के पहले पद्म पुरस्कार प्रदान किए। शिबू सोरेन की ओर से उनके परिवार के सदस्यों ने यह सम्मान ग्रहण किया।
केंद्र सरकार ने 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा करते हुए ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण देने की घोषणा की थी। इस सम्मान के बाद झारखंड सहित पूरे देश में उनके समर्थकों और आदिवासी समाज के बीच खुशी की लहर है।
शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते थे। उन्होंने अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक संघर्ष किया और आदिवासी, दलित एवं वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। वे झामुमो के संस्थापक थे और झारखंड की राजनीति में दशकों तक प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे।
उन्होंने कई बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी निभाई। जनसरोकारों से जुड़े उनके संघर्ष और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए किए गए कार्यों के कारण उन्हें ‘दिशोम गुरु’ के नाम से पहचान मिली।
पद्म भूषण सम्मान मिलने पर झारखंड के राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया। कई नेताओं ने कहा कि यह सम्मान शिबू सोरेन के संघर्षपूर्ण जीवन और झारखंड आंदोलन में उनके ऐतिहासिक योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है।