राधा गोविन्द विश्वविद्यालय में खोरठा साहित्यकार गोविन्द महतो ‘जंगली’ की 81वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई

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रामगढ़, 6 फरवरी: राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के खोरठा विभाग ने खोरठा भाषा-साहित्य के प्रमुख स्तंभ एवं प्रख्यात साहित्यकार गोविन्द महतो ‘जंगली’ की 81वीं जयंती श्रद्धापूर्वक एवं गरिमामय ढंग से मनाई। कार्यक्रम में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा मातृभाषा खोरठा के संरक्षण, लोक-साहित्य के प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक अस्मिता पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष ओहदार अनाम के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने गोविन्द महतो ‘जंगली’ को खोरठा भाषा को सामाजिक सम्मान दिलाने वाले महान संघर्षशील साहित्यकार बताया, जिनका साहित्य खोरठा समाज की चेतना एवं पहचान का प्रतीक है।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी. एन. साह ने कहा कि जंगली जी खोरठा भाषा के सच्चे साधक थे। उनके लेखन एवं सामाजिक कार्यों ने मातृभाषा को नई पहचान दी तथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बने।

सचिव प्रियंका कुमारी ने जिक्र किया कि जंगली जी ने खोरठा को महज साहित्य तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जन-जीवन से जोड़ा। विभाग निरंतर उनके योगदान को छात्रों तक पहुंचा रहा है। कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने मातृभाषा में शिक्षा एवं शोध को भाषा संरक्षण का मजबूत माध्यम बताते हुए जंगली जी के संघर्ष को अकादमिक विकास का मार्गदर्शक बताया। कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल ने उनके साहित्य को ग्रामीण जीवन, संस्कृति एवं सामाजिक सरोकारों का जीवंत दस्तावेज करार दिया, जो साहित्यिक के साथ सांस्कृतिक आंदोलन भी है।

लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार ने कहा कि भाषा-संस्कृति के संरक्षण में संस्थागत सहयोग जरूरी है। जंगली जी जैसे साहित्यकारों का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है, जिसे संरक्षित एवं प्रचारित करना चाहिए।

इस अवसर पर वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, विभाग के अन्य शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम खोरठा भाषा एवं साहित्य के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।