चांडिल डैम को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी, पर्यटन विकास से बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर

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जमशेदपुर/सरायकेला, 04 नवंबर: झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल चांडिल डैम को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य चांडिल जलाशय की प्राकृतिक सुंदरता को पर्यटन की दृष्टि से नई पहचान देना और क्षेत्र में पर्यटन आधारित रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। योजना के धरातल पर उतरने से सरायकेला-खरसावां जिले के साथ आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को अपने परिजनों के साथ चांडिल डैम का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह के साथ डैम के समग्र विकास को लेकर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने पर्यटन संवर्धन, जल प्रबंधन, चांडिल परियोजना के कार्यों में तेजी लाने तथा बिजली उत्पादन की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत चांडिल डैम को इको टूरिज्म श्रेणी में समग्र विकास के लिए चयनित किया गया है। इसके तहत इसे केवल पिकनिक और नौकायन स्थल तक सीमित रखने के बजाय प्रकृति, पर्यावरण, स्थानीय संस्कृति और शैक्षणिक पर्यटन से जोड़ने की योजना है। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया आधिकारिक पर्यटन विभाग के अनुसार जारी है।

पर्यटकों के लिए नौकायन, वाटर स्पोर्ट्स, प्रकृति भ्रमण, बेहतर आधारभूत सुविधाओं और स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा, आवागमन और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम करने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक विकास का खाका तैयार करने का निर्देश दिया है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं, ग्रामीणों, छोटे कारोबारियों और विस्थापित परिवारों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

चांडिल डैम अपनी विशाल जलराशि, प्राकृतिक सुंदरता और दलमा की पहाड़ियों के कारण पहले से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। अब इसे योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने की पहल से झारखंड के पर्यटन मानचित्र पर इसे राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिलने की संभावना बढ़ गई है।