झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का होगा मुफ्त इलाज, सरकार उठाएगी 10 लाख रुपये तक का खर्च

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रांची, 31 अक्टूबर: झारखंड सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गंभीर हृदय रोग से राहत दिलाने के लिए विशेष पहल शुरू की है। अब जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज और हार्ट सर्जरी का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। इसके तहत सामान्य मामलों में प्रति बच्चे 5 से 10 लाख रुपये तक तथा गंभीर मामलों में 15 लाख रुपये तक खर्च करने की व्यवस्था की गई है।

शुक्रवार को रांची स्थित रिम्स के ऑडिटोरियम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्वास्थ्य विभाग और केरल के कोच्चि स्थित अमृता हॉस्पिटल के संयुक्त सहयोग से ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ (Gift of Life) कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे जन्म से 18 वर्ष तक के करीब 380 बच्चों की हृदय संबंधी जांच की गई। इनमें से 350 से अधिक बच्चों को इस पहल के तहत इलाज का लाभ मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जांच में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि होने पर बच्चों को उनकी बीमारी और चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें दवाइयां, आवश्यक जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकों का परामर्श, कैथेटर आधारित उपचार और हार्ट सर्जरी शामिल हैं। बच्चों के अस्पताल में रहने, भोजन, दवाइयों तथा बच्चे और उनके अभिभावक के आने-जाने का खर्च भी सरकार वहन करेगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने रिम्स में जन्मजात हृदय रोग के इलाज और ऑपरेशन की स्थायी व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि अगले एक वर्ष के भीतर विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था करने की दिशा में काम किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को सांस लेने में परेशानी, दूध पीने में कठिनाई, वजन नहीं बढ़ने, अत्यधिक पसीना आने या होंठ नीले पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय जांच कराएं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी अपने क्षेत्रों में ऐसे बच्चों की पहचान कर स्वास्थ्य विभाग को जानकारी देने की अपील की।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण किसी भी बच्चे का हृदय रोग का इलाज नहीं रुकने देना और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।