मेरा शब्द, मेरी कहानी’ अभियान से गूंजे रामगढ़ के विद्यालय

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रामगढ़, 09 सितंबर: झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में मंगलवार को ‘मेरा शब्द, मेरी कहानी’ पठन अभियान के तहत Read-a-Thon गतिविधि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में बुनियादी पठन कौशल विकसित करने के साथ नियमित रूप से पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना है।

राज्यभर में यह अभियान 15 अगस्त से 18 सितंबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में 8 सितंबर को रामगढ़ जिले के विभिन्न विद्यालयों में आयोजित Read-a-Thon में विद्यार्थियों के साथ शिक्षक, अभिभावक एवं समुदाय के सदस्यों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। निर्धारित समय सुबह 11 बजे से 11:30 बजे तक प्रतिभागियों ने बाल साहित्य की पुस्तकों का सामूहिक पठन किया।

अभियान के माध्यम से बच्चों को केवल पढ़ने के लिए प्रेरित करना ही नहीं, बल्कि पढ़ी गई सामग्री को समझने, उस पर विचार करने और अपनी बात अपने शब्दों में व्यक्त करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। बाल वाटिका से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को इससे जोड़ते हुए उनकी पठन समझ, भाषा कौशल, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

विद्यालयों में Read Aloud, Shared Reading, Word Story Creation, Our Story in Our Words, World of Stories, QR Code Story Walls और Student Podcast जैसी विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें Read-a-Thon के माध्यम से बच्चों को सामूहिक रूप से पुस्तक पढ़ने और पठन को बोझ के बजाय आनंददायक गतिविधि के रूप में अपनाने का अवसर मिल रहा है।

जिला शिक्षा अधीक्षक खुशबू कुमारी ने बताया कि जिले के कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी विद्यालयों में अभियान की गतिविधियों का समयबद्ध और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए विद्यालय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता में शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक और समुदाय की सक्रिय सहभागिता महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से विद्यालयों में विकसित हो रही पठन संस्कृति को बच्चों के घर और समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

‘मेरा शब्द, मेरी कहानी’ अभियान बच्चों को किताबों से जोड़ने के साथ उनकी कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।