पटना 06 अगस्त: पटना हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार में पहले से कोई सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत है और लागू सरकारी नीति ऐसी स्थिति में अनुकंपा नियुक्ति पर रोक लगाती है, तो दूसरे आश्रित को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी का अधिकार नहीं मिलेगा। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना है, न कि इसे नियमित नियुक्ति या अधिकार के रूप में देखा जाए।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं है। यह केवल विशेष परिस्थितियों में परिवार की आर्थिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए दी जाने वाली राहत है। यदि परिवार में पहले से कोई सदस्य सरकारी नौकरी कर रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने में सक्षम है, तो अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य समाप्त हो जाता है।
हाई कोर्ट ने यह भी दोहराया कि अनुकंपा नियुक्ति संबंधी मामलों में संबंधित विभाग की नीति और नियमों का पालन अनिवार्य है। न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति सामान्य भर्ती प्रक्रिया का विकल्प नहीं है, बल्कि केवल मानवीय आधार पर दी जाने वाली सीमित राहत है।
हालांकि, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रत्येक मामला उसके तथ्यों और संबंधित राज्य की नीति के आधार पर तय किया जाएगा। यदि किसी अन्य कमाऊ सदस्य की आय परिवार का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त नहीं है और परिवार वास्तव में गंभीर आर्थिक संकट में है, तो सक्षम प्राधिकारी नीति के अनुसार मामले पर विचार कर सकता है।
इस फैसले को अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट संदेश गया है कि ऐसी नियुक्तियों का उद्देश्य केवल जरूरतमंद परिवारों को तत्काल राहत देना है, न कि सरकारी नौकरी प्राप्त करने का वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध कराना।