नई दिल्ली, 5 अगस्त। सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन बीमा नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा बीमा नियामक आईआरडीएआई को ऐसी पायलट परियोजना तैयार करने को कहा है, जिसके तहत वैध थर्ड पार्टी बीमा नहीं रखने वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना अनिवार्य बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। अदालत के अनुसार, लगभग 16.54 करोड़ वाहन ऐसे हैं जिनके पास वैध बीमा नहीं है, जो सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे की व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
न्यायालय ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है, लेकिन इसके पालन में भारी लापरवाही देखी जा रही है। अदालत ने सुझाव दिया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ई-चालान जारी किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल” व्यवस्था को लागू करने से पहले इसके लिए एक पायलट परियोजना तैयार की जाए, ताकि इसकी व्यवहारिकता और प्रभाव का आकलन किया जा सके। इसके बाद ही व्यापक स्तर पर इसे लागू करने पर विचार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो वाहन मालिकों को समय पर बीमा नवीनीकरण कराने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकेगी। हालांकि, यह व्यवस्था अभी पूरे देश में लागू नहीं हुई है और फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केवल पायलट योजना तैयार करने का निर्देश दिया है।