एनजीटी की रोक से पहले अवैध खनन और जमाखोरी तेज, निर्माण कार्य प्रभावित
रांची, 28 मई: झारखंड में एक बार फिर बालू संकट गहराने लगा है। राज्य के 17 बालू घाटों की लीज प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक सीटीओ (कंसेंट टू ऑपरेट) जारी नहीं होने से वैध तरीके से बालू उठाव शुरू नहीं हो सका है। दूसरी ओर, एनजीटी की संभावित रोक से पहले कई इलाकों में अवैध खनन और बालू की जमाखोरी तेजी से बढ़ गई है। इसका असर निर्माण कार्यों और बाजार में बालू की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों के 17 बालू घाटों की बंदोबस्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन पर्यावरणीय और तकनीकी मंजूरियों के अभाव में संचालन शुरू नहीं हो पाया है। सीटीओ लंबित रहने से वैध आपूर्ति बाधित है, जबकि दूसरी ओर माफिया सक्रिय होकर नदियों से अवैध उठाव कर रहे हैं।
बालू की कमी के कारण राजधानी रांची समेत धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर और पलामू जैसे जिलों में निर्माण कार्य प्रभावित होने लगे हैं। निजी भवन निर्माण, सरकारी योजनाओं और सड़क परियोजनाओं की गति धीमी पड़ रही है। बाजार में बालू की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक एनजीटी के नियमों के तहत मानसून अवधि में कई घाटों पर खनन गतिविधियों पर रोक लग सकती है। इसी आशंका के चलते अवैध कारोबारी बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण कर रहे हैं, ताकि आने वाले महीनों में ऊंचे दामों पर बिक्री की जा सके।
खनन विभाग का कहना है कि आवश्यक औपचारिकताओं को जल्द पूरा कर वैध बालू उठाव शुरू कराने की कोशिश की जा रही है। वहीं प्रशासन ने अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। कई जिलों में छापेमारी अभियान भी चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वैध आपूर्ति शुरू नहीं होने पर आने वाले दिनों में बालू संकट और गहरा सकता है, जिससे निर्माण क्षेत्र पर व्यापक असर पड़ेगा।