रांची, 01 मई: राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण पत्र के आधार पर दाखिला लेने वाली MHA छात्रा ओली विश्वकर्मा की परेशानियां बढ़ गई हैं। RIMS प्रशासन ने जांच रिपोर्ट आने के बाद तुरंत उसका नामांकन रद्द कर दिया है। ओली लालपुर थाना क्षेत्र में MDS छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में मुख्य आरोपी के रूप में फिलहाल रांची जेल में बंद है।
रामगढ़ उपायुक्त द्वारा गठित विशेष जांच समिति ने ओली विश्वकर्मा द्वारा जमा किए गए ST प्रमाण पत्र को फर्जी पाया। नामांकन के समय विश्वकर्मा समुदाय की इस छात्रा ने अनुसूचित जनजाति का लाभ लेने के लिए गलत दस्तावेज जमा किए थे। RIMS डीन कार्यालय ने इसकी पुष्टि के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए नामांकन रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। संबंधित जानकारी रामगढ़ उपायुक्त को भी भेज दी गई है।
ओली विश्वकर्मा पर 9 अप्रैल की रात लालपुर क्षेत्र के गोकुल वाटिका अपार्टमेंट में अपनी सहेली (MDS छात्रा) को बर्थडे पार्टी के बहाने बुलाकर नशीला पदार्थ (पिज्जा में मिलाकर) देने और सामूहिक दुष्कर्म की साजिश रचने का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद दानिश, मोहम्मद फहद और ओली विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया था, जबकि एक आरोपी शादाब फरार है।
पीड़िता के बयान के आधार पर लालपुर थाने में BNS की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। ओली पर पीड़िता को फंसाने और घटना में सहयोग करने का गंभीर आरोप है।
RIMS सूत्रों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों पर दाखिला लेने वालों के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है। इस मामले में भी त्वरित कार्रवाई की गई। ओली विश्वकर्मा जेल में होने के कारण इस फैसले की सूचना उसके परिजनों को दी गई है।
यह घटना फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के जरिए आरक्षण का दुरुपयोग और मेडिकल शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती को एक बार फिर उजागर करती है। पुलिस दुष्कर्म मामले की आगे की जांच कर रही है, जबकि RIMS प्रशासन ने सभी छात्रों के दस्तावेजों की जांच तेज कर दी है।