रामगढ़, 03 मई:राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित “एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3D प्रिंटिंग)” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यशाला के दूसरे दिन व्यावहारिक सत्रों, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और छात्रों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्रों को 3D प्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से स्टार्टअप के लिए प्रेरित करना, अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ाना तथा कम लागत में अधिक लाभ वाले लघु उद्योगों की संभावनाओं से अवगत कराना था। दूसरे दिन विशेषज्ञों ने 3D प्रिंटर के विभिन्न घटकों, सामग्री चयन, प्रिंट सेटिंग्स और प्रोटोटाइप निर्माण की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। साथ ही विद्यार्थियों को स्वयं डिजाइन किए गए मॉडल्स को प्रिंट करने का अवसर भी दिया गया, जिससे उन्हें वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्राप्त हुआ।
कार्यशाला में बीआईटी मेसरा के प्रो. (डॉ.) कौशिक कुमार एवं एनआईटी राउरकेला के डॉ. चिकेश रंजन ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया। उन्होंने 3D प्रिंटिंग के औद्योगिक उपयोग, स्टार्टअप के अवसरों और भविष्य के करियर विकल्पों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक उत्पादन प्रक्रिया को सरल बनाते हुए समय और लागत दोनों की बचत करती है।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी.एन. साह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यावहारिक कौशल और तकनीकी दक्षता ही सफलता की कुंजी है।
समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों, शिक्षकों और छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यशाला का सफल संचालन डॉ. विश्व दीपक कुमार एवं डॉ. सत्यप्रकाश पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विनय प्रकाश चौधरी ने दिया।
बी.टेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र सनी कुमार ने कहा कि इस कार्यशाला से उन्हें 3D प्रिंटिंग को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला, जिससे वे अपने प्रोजेक्ट्स में इसका उपयोग करने के लिए अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं। वहीं, डिप्लोमा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा किरण यादव ने इसे उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें नई तकनीक सीखने के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसरों की भी जानकारी मिली।