नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम को राष्ट्र के नाम संबोधन में भावुक होकर देश की माताओं और बहनों से माफी मांगी। लोकसभा में महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) से जुड़े संविधान संशोधन बिल के पास न होने पर उन्होंने यह कदम उठाया। पीएम मोदी ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि दलगत स्वार्थ और छोटी राजनीति के कारण महिलाओं के सपनों को कुचला गया है और इस पाप की सजा उन्हें जरूर मिलेगी।
संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे भरसक प्रयासों के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया। मैं सभी माताओं-बहनों से माफ़ी चाहता हूं।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष ने नारी शक्ति के खिलाफ पाप किया है और महिलाएं इसे कभी माफ नहीं करेंगी। जनता भी उन्हें माफ नहीं करेगी।
यह संबोधन शुक्रवार 18 अप्रैल को लोकसभा में संविधान 131वां संशोधन बिल, 2026 के असफल होने के एक दिन बाद आया। इस बिल के जरिए सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को और प्रभावी बनाने, परिसीमन के बाद लोकसभा सीटें बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही थी। बिल दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पास नहीं हो सका।
पीएम मोदी ने विपक्षी दलों- कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने “स्वार्थी राजनीति” को प्राथमिकता दी और महिलाओं की प्रगति को रोक दिया। उन्होंने इसे “नारी शक्ति के खिलाफ पाप” और “संविधान के खिलाफ अपराध” करार दिया।
संबोधन में पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हारी नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारा हौसला बुलंद है। आगे भी इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। महिलाओं को उनका हक जरूर मिलेगा।”
विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह परिसीमन और अन्य मुद्दों को लेकर उलटफेर कर रही है। कांग्रेस ने पहले ही पीएम मोदी से माफी मांगने की मांग की थी, लेकिन अब इस संबोधन को राजनीतिक स्टंट बता रही है।
देश भर में इस घटना पर चर्चा तेज है। महिला संगठन और राजनीतिक विश्लेषक इसे महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक टकराव मान रहे हैं।
सरकार का कहना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पारित हो चुका है, लेकिन उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह संशोधन जरूरी था। अब आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।