रांची, 15 अप्रैल 2026: बोकारो और हजारीबाग के ट्रेजरी घोटालों की तर्ज पर राजधानी रांची में भी बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। कांके स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन की ट्रेजरी से पिछले तीन वर्षों में लगभग 3 से 3.5 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी का खुलासा हुआ है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने मुख्य रूप से वेतन मद में फर्जी बिल तैयार कर ट्रेजरी से पैसे निकाले। प्रारंभिक जांच में यह अनियमितता सामने आई, जबकि आगे की ऑडिट में राशि और बढ़ सकती है।
आरोपी और कार्रवाई
• मुनिंद्र कुमार (लेखापाल/हेड क्लर्क): मुख्य आरोपी, गिरफ्तार। पुलिस ने कोतवाली थाने में FIR दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया है।
• संजीव कुमार (दूसरा कर्मचारी): तलाश जारी, फरार।
पशुपालन विभाग के डीडीओ की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया। कई अन्य कर्मचारियों से पूछताछ चल रही है। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी खजाने से पैसे अपने या सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किए।
यह घोटाला हाल ही में बोकारो (पुलिस वेतन से करोड़ों की निकासी) और हजारीबाग (15-28 करोड़ तक) के ट्रेजरी घोटालों के बाद सामने आया है। झारखंड में ट्रेजरी अनियमितताओं की श्रृंखला बढ़ रही है, जिससे विपक्ष ने CBI जांच की मांग की है। कई नेता इसे पुराने चारा घोटाले का नया रूप बता रहे हैं
वित्त विभाग ने सभी जिलों के कोषागारों में सख्त ऑडिट के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि एक-एक पैसे की रिकवरी होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांचकर्ताओं का मानना है कि यह घोटाला सिर्फ तीन साल का नहीं हो सकता; पुरानी रिकॉर्ड की जांच में और बड़े अनियमितता सामने आ सकती है। पुलिस और प्रशासन दोनों स्तर पर जांच तेज कर दी गई है।
यह मामला सरकारी विभागों में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी को फिर उजागर करता है। आगे की जांच में और खुलासे होने की संभावना है।