रांची, 8 अगस्त 2025: झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के बाद उनके पैतृक गांव नेमरा में श्राद्ध कर्म शुरू हो गए हैं। गुरुवार, 7 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संथाली परंपरा के अनुसार “तीन कर्म” की विधियां पूरी कीं। इस दौरान उन्होंने गांव के बुजुर्गों और परिजनों के साथ 15 अगस्त को होने वाले दशकर्म और पिंडदान की तैयारियों पर चर्चा की।
शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर 4 अगस्त को दिल्ली से रांची लाया गया था। मोरहाबादी स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन की व्यवस्था की गई थी। दशकर्म के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। एक आईपीएस अधिकारी की देखरेख में नेमरा और रांची में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं ताकि सभी रीति-रिवाज सुचारू रूप से संपन्न हों।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो संथाली रिवाजों में “मुखिया” की भूमिका निभा रहे हैं, दस दिनों तक नेमरा की सीमा में रहकर सभी कर्मकांड पूरे कर रहे हैं। इस दौरान वह अपने पिता के कफन से बने पारंपरिक वस्त्र पहने हुए हैं। 7 अगस्त को राज्यपाल संतोष गंगवार ने नेमरा पहुंचकर शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी।
“दिशोम गुरु” के नाम से विख्यात शिबू सोरेन के निधन से झारखंड में शोक की लहर है। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि उनकी अंतिम रस्में सम्मान और परंपरा के साथ पूरी हों। दशकर्म के लिए सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।