नई दिल्ली, 04 सितंबर: सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, YouTubers, सोशल मीडिया से जुड़े लोगों और अन्य बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश तथा स्कूल परिसर में फोटो-वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लागू इन प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने एक सितंबर को दिए आदेश में कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस रिट याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं है। इसका मतलब यह है कि अदालत ने इन प्रतिबंधों को पूरे देश के लिए कोई नया नियम बनाकर मंजूर नहीं किया है, बल्कि इस विशेष याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है।
याचिका में राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 16 अगस्त 2026 को जारी सर्कुलर को चुनौती दी गई थी। इसके तहत सरकारी स्कूल में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य से पूर्व अनुमति लेना जरूरी किया गया है। वहीं फोटो, वीडियो, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी पहले से लिखित अनुमति लेने का प्रावधान किया गया है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से 19 अगस्त को जारी आदेश में बाहरी लोगों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्तियों को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना परिषद के स्कूलों में प्रवेश करने तथा फोटो-वीडियो बनाने से रोका गया था। याचिका के अनुसार आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा सहित अन्य जिलों में भी ऐसे निर्देश जारी किए गए।
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि सार्वजनिक हित में सरकारी स्कूलों की स्थिति जैसे कक्षाओं, शौचालय, पेयजल, बिजली और अन्य सुविधाओं का दस्तावेजीकरण पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। हालांकि बच्चों की निजता, सुरक्षा और गरिमा की रक्षा के लिए उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।