शहरी और दियारा इलाकों में घुसा पानी, कई निचले इलाके जलमग्न; प्रशासन अलर्ट
पटना, 04 सितंबर: बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के उफान से बाढ़ का संकट एक बार फिर गंभीर होता जा रहा है। पटना में गंगा का जलस्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है और निचले इलाकों में पानी प्रवेश करने लगा है। दीघा से लेकर मोकामा तक नदी किनारे बसे इलाकों में लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई दियारा क्षेत्रों, खेतों और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने की खबर है।
केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 4 सितंबर की सुबह छह बजे दीघाघाट पर गंगा का जलस्तर 51.68 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 50.45 मीटर से ऊपर है। गांधी घाट पर जलस्तर 50.36 मीटर रहा, जबकि हाथीदह में यह 43.24 मीटर दर्ज किया गया। हाथीदह में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है और बढ़ने की स्थिति में है।
गंगा के बढ़ते दबाव का असर पटना के शहरी हिस्सों में भी दिखाई देने लगा है। दीघा क्षेत्र में कई घरों और आसपास के इलाकों में पानी पहुंचने की सूचना है। जेपी गंगा पथ और नदी किनारे के कई हिस्सों में भी बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। दानापुर, बख्तियारपुर और मोकामा के निचले इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
जल संसाधन विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर पटना के गांधी घाट पर गंगा के उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने की आशंका जताई गई थी। वहीं हाथीदह (मोकामा) में 4 सितंबर की दोपहर के आसपास उच्चतम बाढ़ स्तर पार करने का खतरा बताया गया है। इसे देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
बिहार में केवल गंगा ही नहीं, बल्कि कोसी, गंडक, पुनपुन, बूढ़ी गंडक समेत कई नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पटना में गंगा के साथ पुनपुन और दरधा नदी के बढ़े जलस्तर ने भी मुश्किल बढ़ाई है। राज्य के कई जिलों में बाढ़ का प्रभाव देखा जा रहा है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर निगरानी बढ़ाई गई है। घाटों पर आवाजाही प्रतिबंधित करने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। SDRF की टीमें भी नाव और अन्य संसाधनों के साथ अलर्ट पर हैं।
स्थिति को देखते हुए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से प्रशासन की अपील है कि वे अनावश्यक रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में न जाएं और सरकारी निर्देशों का पालन करें।