नई दिल्ली में MoU पर हस्ताक्षर, लाखों किसानों को सिंचाई और पेयजल का लाभ; इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का रास्ता भी साफ
नई दिल्ली, 01 सितंबर :बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर करीब 26 वर्षों से चला आ रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया। सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल सहित केंद्र और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समझौते के तहत सोन नदी के कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल के बंटवारे का प्रावधान किया गया है। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में दोनों राज्यों के हिस्से का विस्तृत आंकड़ा नहीं बताया गया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में हिस्सेदारी के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है, इसलिए अखबार में आधिकारिक दस्तावेज के स्पष्ट आंकड़े आने तक इसे सावधानी से प्रकाशित करना उचित होगा।
सोन नदी के जल बंटवारे का मूल विवाद वर्ष 1973 के बाणसागर समझौते से जुड़ा है। उस समय झारखंड बिहार का हिस्सा था और अविभाजित बिहार को सोन नदी के पानी में हिस्सा मिला था। वर्ष 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद पुराने समझौते में उसकी हिस्सेदारी को लेकर सवाल खड़ा हुआ। झारखंड ने सोन नदी के जल में अपने हिस्से की मांग की, जबकि बिहार 1973 के समझौते के आधार पर अपने हिस्से का दावा करता रहा।
विवाद के कारण सोन नदी पर प्रस्तावित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना भी लंबे समय से अटकी रही। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना के लिए झारखंड से अनापत्ति प्रमाणपत्र सहित अंतरराज्यीय जल बंटवारे के मुद्दे का समाधान जरूरी था।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समझौते को पूर्वी भारत के एक लंबे समय से लंबित जल विवाद का समाधान बताते हुए कहा कि इससे बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी को सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा।
समझौते से झारखंड के पलामू, गढ़वा और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई तथा पेयजल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। सोन नदी से जुड़े क्षेत्रों में लंबे समय से पानी की उपलब्धता और सिंचाई को लेकर समस्याएं रही हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि समझौते से दोनों राज्यों के बड़े ग्रामीण क्षेत्र और लाखों किसान लाभान्वित होंगे।
जल बंटवारे का विवाद खत्म होने के बाद बिहार की महत्वाकांक्षी इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता भी साफ होने की उम्मीद है। यह परियोजना करीब पांच दशक से अधिक समय से लंबित है। परियोजना के लिए अंतरराज्यीय जल बंटवारे और संबंधित राज्यों की सहमति अहम मुद्दा रही थी।
केंद्र सरकार ने इस समझौते को सहकारी संघवाद का उदाहरण बताया है। अमित शाह ने कहा कि संवाद और सहयोग के जरिए लंबे समय से लंबित अंतरराज्यीय जल विवादों का समाधान निकाला जा सकता है।