JPSC की पुरानी परीक्षाओं पर गहराया संदेह, अभय तिवारी के कथित बयान से FRO-ACF तक जांच

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रांची, 13 अगस्त: झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच अब 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से आगे बढ़ती नजर आ रही है। गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी से सीआईडी की पूछताछ में सामने आए कथित बयानों ने FRO (फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर), ACF (असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट) सहित पूर्व की कई परीक्षाओं और इंटरव्यू प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में ला दिया है। हालांकि, सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

रिपोर्टों के मुताबिक अभय तिवारी ने पूछताछ के दौरान 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा में भी कथित गड़बड़ी होने और कुछ अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में पैसे के बदले अंक बढ़ाए जाने का दावा किया है। एक अन्य रिपोर्ट में करीब 20 अभ्यर्थियों से इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये की कथित डील का उल्लेख किया गया है। इन दावों की जांच एजेंसी द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जाना बाकी है।

जांच का एक महत्वपूर्ण सिरा FRO और ACF परीक्षाओं से भी जुड़ता है। जनवरी 2026 में JPSC को करीब 500 OMR शीट में कथित गड़बड़ी को लेकर शिकायत मिलने की बात सामने आई थी। शिकायत में अभय तिवारी का नाम भी शामिल था। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि OMR शीट, परीक्षा एजेंसी और आयोग के स्तर पर क्या हुआ था और शिकायत मिलने के बाद किस तरह की कार्रवाई की गई।

अभय तिवारी का संबंध TSR Data Processing Pvt. Ltd. से भी जांच में सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार वह कंपनी से जुड़े रहे थे और बाद में सरकारी अधिकारी बने। इसी कारण जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी, अभ्यर्थियों और आयोग से जुड़े लोगों के बीच किसी तरह का संपर्क या लेन-देन था या नहीं। TDPL की भूमिका पहले भी जांच के घेरे में रही है।

पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुराने दावों में सच्चाई मिलती है तो कथित अनियमितताएं केवल एक परीक्षा तक सीमित थीं या भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों तक फैली हुई थीं। इंटरव्यू में अंक बढ़ाने, OMR में छेड़छाड़ और परीक्षा एजेंसी की भूमिका जैसे बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ने से आने वाले दिनों में कई और नाम और तथ्य सामने आने की संभावना है।

सीआईडी की जांच में JPSC के पूर्व अधिकारियों और परीक्षा से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ भी हो चुकी है। ऐसे में अभय तिवारी के कथित बयान अब जांच के लिए महत्वपूर्ण कड़ी माने जा रहे हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की भूमिका या आरोपों को दोष सिद्ध होने से पहले अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।