रामगढ़, 31 जुलाई: राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में गुरुवार को “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं संस्कृत उत्थान” विषय पर भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी. एन. साह के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक साहित्य, संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन तथा नई शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में संस्कृत के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय संस्कृत भारती के संस्कृत प्रचार प्रमुख श्रीशदेव पुजारी ने कहा कि संस्कृत भारत की प्राचीन ज्ञान-विज्ञान, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि इस समृद्ध धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथियों में संस्कृत भारती झारखंड के प्रांत मंत्री पृथ्वीराज सिंह, प्रांत विद्यालय प्रमुख डॉ. सुनील कुमार कश्यप, न्यासी ओमप्रकाश गुप्ता, रामगढ़ जिला संरक्षक गोविंद मेवाड़ तथा ज्ञान ब्रह्म पाठक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न एवं पौधा भेंटकर सम्मान किया गया।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल स्रोतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका है।
संगोष्ठी का संचालन कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की सचिव प्रियंका कुमारी, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, विद्वानों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण तथा संस्कृत भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प दोहराया।