आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, डिस्चार्ज याचिका खारिज

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टेंडर कमीशन व मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार

रांची,17 सितंबर: झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को टेंडर आवंटन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी और झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनकी डिस्चार्ज याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी थी।

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। आलमगीर आलम की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी। अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

इससे पहले 6 मई 2026 को झारखंड हाईकोर्ट ने भी आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने कहा था कि डिस्चार्ज के चरण में अदालत को साक्ष्यों का अंतिम मूल्यांकन नहीं करना होता, बल्कि यह देखना होता है कि आरोपी के खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला बनता है या नहीं।

मामला ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन के बाद कथित कमीशनखोरी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों का है। ईडी की जांच के दौरान आलमगीर आलम के तत्कालीन निजी सचिव संजीव कुमार लाल से जुड़े ठिकानों से नकदी और कथित हिसाब-किताब से संबंधित दस्तावेज बरामद होने का दावा किया गया था। हाईकोर्ट के आदेश में 32.20 करोड़ रुपये की नकदी बरामदगी और कथित कमीशन के हिसाब वाली डायरियों का भी उल्लेख है।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद आलमगीर आलम के खिलाफ मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। हालांकि, डिस्चार्ज याचिका खारिज होना दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय नहीं है; मामले के आरोपों और साक्ष्यों का अंतिम निर्धारण ट्रायल में होगा।