कटिहार, 04 जुलाई: भारतीय रेलवे ने देश के सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। केंद्र सरकार इस संवेदनशील क्षेत्र में अंडरग्राउंड ब्लास्ट-प्रूफ रेलवे लाइन बनाने की योजना पर काम कर रही है। यह परियोजना पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से हर परिस्थिति में जोड़कर रखने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।
प्रस्तावित रेल लाइन पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के कटिहार मंडल के अंतर्गत आएगी। इसका मार्ग टिनमाइल हाट–रंगापानी–बागडोगरा के बीच प्रस्तावित है, जो बिहार के किशनगंज तथा पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और उत्तर दिनाजपुर जिलों से होकर गुजरेगा। परियोजना की कुल लंबाई लगभग 35.76 किलोमीटर होगी, जिसमें अधिकांश हिस्सा भूमिगत रहेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति, प्राकृतिक आपदा या सुरक्षा चुनौती के दौरान पूर्वोत्तर भारत के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध रेल संपर्क सुनिश्चित करना है। भूमिगत और ब्लास्ट-प्रूफ डिजाइन के कारण यह रेल मार्ग बाहरी खतरों के प्रति अधिक सुरक्षित रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए अत्यंत रणनीतिक महत्व रखता है। यही संकरा भूभाग देश के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भारत से जोड़ता है। ऐसे में भूमिगत रेल लाइन बनने से सैन्य रसद, नागरिक परिवहन और माल ढुलाई को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी तथा इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर की क्षमता और मजबूती भी बढ़ेगी।