कोलकाता, 03 जून: पश्चिम बंगाल में बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए जुलाई 2026 से बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत राज्य के लगभग 2 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के घरों में पुराने मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। शुरुआत सरकारी कार्यालयों और परिसरों से होगी, इसके बाद बड़े उपभोक्ताओं तथा फिर घरेलू उपभोक्ताओं को इस योजना के दायरे में लाया जाएगा।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने से बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण, बिलिंग में पारदर्शिता और बकाया राशि की वसूली में मदद मिलेगी। उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे अपनी सुविधा के अनुसार भुगतान प्रणाली चुन सकेंगे।
सरकार का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने के लिए उपभोक्ताओं को एकमुश्त भुगतान नहीं करना होगा। योजना को केंद्र की बिजली वितरण सुधार पहल के तहत लागू किया जा रहा है। स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बिजली खपत की रियल-टाइम जानकारी देंगे, जिससे वे अपने बिजली खर्च को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकेंगे।
जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के बिजली वितरण क्षेत्र पर लगभग 15,000 करोड़ रुपये का संचयी घाटा है। सरकार को उम्मीद है कि स्मार्ट मीटरिंग से राजस्व संग्रह में सुधार होगा, तकनीकी एवं वाणिज्यिक नुकसान कम होंगे और बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। साथ ही भविष्य में टैरिफ ढांचे को अधिक वैज्ञानिक और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने में भी मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर योजना सफल होने पर राज्य की बिजली व्यवस्था अधिक दक्ष, पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बन सकेगी, जिससे बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।