CBSE का नया नियम: कक्षा 9 से अब तीन भाषाएं अनिवार्य, 2026-27 से लागू

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नई दिल्ली/रांची, 18 मई: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने छात्रों में बहुभाषिकता को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब कक्षा 9 से तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड के 15 मई 2026 को जारी सर्कुलर के अनुसार यह नई व्यवस्था सत्र 2026-27 से लागू होगी।

CBSE के सर्कुलर (Acad-33/2026) के मुताबिक, कक्षा 9 में R1, R2 और R3 तीन भाषाएं अनिवार्य होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं (Native Indian Languages) होनी जरूरी हैं। छात्र तीसरी भाषा के रूप में विदेशी भाषा (फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश आदि) भी चुन सकते हैं, लेकिन पहले दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य रहेंगी।

मुख्य प्रावधान

• कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य।

• विदेशी भाषा केवल तीसरी भाषा (R3) के रूप में ही ली जा सकेगी।

• कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक होगा, हालांकि पास होना अनिवार्य रहेगा।

• यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा (NCF-SE 2023) के तहत लाई गई है।

CBSE के अनुसार, स्कूल अपनी सुविधा, शिक्षकों की उपलब्धता और संसाधनों के आधार पर भाषाओं के विकल्प उपलब्ध कराएंगे। एक भाषा को दो बार नहीं दोहराया जा सकेगा। जो छात्र कक्षा 6 में तीसरी भाषा (R3) शुरू कर चुके हैं, उन्हें कक्षा 9 में भी उसी भाषा को जारी रखने का विकल्प मिलेगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम छात्रों में सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक भाषाई कौशल विकसित करने में मदद करेगा। हालांकि कई अभिभावक और स्कूल प्रबंधन शिक्षकों की कमी और अतिरिक्त बोझ को लेकर चिंता जता रहे हैं।

CBSE चेयरमैन ने कहा, “बहुभाषिक शिक्षा छात्रों के समग्र विकास के लिए जरूरी है। यह बदलाव उन्हें भविष्य के लिए बेहतर तैयार करेगा।”

यह नियम पूरे देश के CBSE संबद्ध स्कूलों पर लागू होगा। अभिभावकों और छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने स्कूल से उपलब्ध भाषा विकल्पों की जानकारी शीघ्र ले लें।