पूर्णिया, 01 मई: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में रह रही नेपाली मूल की उन हजारों महिलाओं के लिए खुशखबरी है, जिन्होंने भारतीय नागरिकों से विवाह किया है। पूर्णिया जिला प्रशासन ने उनके लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने हेतु विशेष अभियान शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश पर प्रखंड स्तर पर कैंप लगाए जा रहे हैं और एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो आवेदन प्रक्रिया को सरल और तेज बनाएगी।
जिलाधिकारी कार्यालय के अनुसार, जिन नेपाली महिलाओं की शादी भारतीय पुरुषों से हुई है और विवाह को 7 वर्ष पूरे हो चुके हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता दिए जाने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। सीमांचल (पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज) और कोसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं वर्षों से भारत में रह रही हैं, लेकिन नागरिकता न मिलने के कारण सरकारी योजनाओं, वोटर कार्ड, पासपोर्ट और अन्य सुविधाओं से वंचित थीं।
डीएम अंशुल कुमार ने इस कार्य के लिए विशेष समिति गठित की है, जिसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। प्रखंड स्तर पर शिविर लगाकर महिलाओं को दस्तावेज जमा करने, आवेदन भरने और सत्यापन में मदद की जाएगी। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार आवेदन के लिए ₹1000 का शुल्क भी निर्धारित किया गया है। महिलाएं ऑनलाइन भी आवेदन कर सकती हैं।
जरूरी दस्तावेज
• विवाह प्रमाण पत्र
• पति का भारतीय नागरिकता प्रमाण
• निवास प्रमाण पत्र
• अन्य संबंधित कागजात
प्रशासन उन मामलों में भी सहयोग कर रहा है जहां दस्तावेजों में कमी हो।
भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा और सदियों पुराने रोटी-बेटी के रिश्तों के कारण सीमावर्ती जिलों में नेपाली बहुओं की संख्या काफी है। यह अभियान न केवल इन महिलाओं को कानूनी पहचान देगा, बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देगा। पश्चिम चंपारण (बेतिया) समेत अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी ऐसी पहल चल रही है।
स्थानीय लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “बहुएं सालों से परिवार संभाल रही हैं, अब उन्हें भी पूर्ण अधिकार मिलेंगे तो घर-परिवार और समाज मजबूत होगा।”
पूर्णिया जिला प्रशासन ने सभी योग्य नेपाली बहुओं से अपील की है कि वे निकटतम प्रखंड कार्यालय या BDO से संपर्क करें और प्रक्रिया पूरी करें। अधिक जानकारी के लिए जिला वेबसाइट या स्थानीय प्रशासनिक कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।