पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: चुनाव या युद्ध की तैयारी? रिकॉर्ड 2400 CAPF कंपनियां तैनात, ढाई लाख से ज्यादा जवान अलर्ट

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कोलकाता, 3 अप्रैल 2026: क्या पश्चिम बंगाल में हो रहे विधानसभा चुनाव सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है या किसी बड़े युद्ध की तैयारी? केंद्र सरकार और चुनाव आयोग ने राज्य में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। कुल 2400 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कंपनियां तैनात की जा रही हैं, जिनमें CRPF की 230 कंपनियां, BSF की 120 कंपनियां, ITBP की 47 कंपनियां, SSB की 46 कंपनियां और CISF की 37 कंपनियां शामिल हैं।

480 कंपनियां पहले ही राज्य पहुंच चुकी हैं और बाकी 1920 कंपनियां चरणबद्ध तरीके से आ रही हैं। एक कंपनी में औसतन 100-150 जवान होते हैं, यानी कुल तैनाती 2.5 लाख से 3 लाख केंद्रीय जवानों की है। यह संख्या 2021 के विधानसभा चुनाव से ढाई से तीन गुना ज्यादा है।

चुनाव दो चरणों में होंगे:

• पहला चरण: 23 अप्रैल 2026 (152 सीटें)

• दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026 (142 सीटें)

मतगणना 4 मई 2026 को होगी। कुल 294 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा।

भारी तैनाती का कारण:

चुनाव आयोग और गृह मंत्रालय का कहना है कि यह रिकॉर्ड तैनाती मुक्त, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए है। पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों में बूथ कैप्चरिंग, राजनीतिक हिंसा और झड़पों की घटनाएं रही हैं। इस बार मतदान केंद्रों के 100 मीटर के दायरे में राज्य पुलिस को नहीं रखा जाएगा। पूरी सुरक्षा केंद्रीय बलों के जिम्मे होगी।

तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र-प्रभावी नियंत्रण, आत्मविश्वास निर्माण, मतदान दिवस की ड्यूटी, EVM और स्ट्रांग रूम की सुरक्षा तथा मतगणना केंद्रों की सुरक्षा है। चुनाव के बाद भी पोस्ट-पोल हिंसा रोकने के लिए सैकड़ों कंपनियां राज्य में रहेंगी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:

विपक्ष इसे जरूरी कदम बताते हुए कह रहे हैं कि राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। विपक्ष ने मांग की थी कि केंद्र राज्य में कानून-व्यवस्था संभाले। वहीं सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC ने इसे “केंद्र की दखलंदाजी” और “राजनीतिक साजिश” करार दिया है। TMC का आरोप है कि केंद्र बंगाल में केंद्रीय बलों के जरिए दबाव बना रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में ‘मसल पावर’ की भूमिका लंबे समय से रही है। चुनाव आयोग इस बार किसी भी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं करना चाहता। लेकिन इतनी भारी तैनाती लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है या राज्य सरकार पर केंद्र का अविश्वास? यह बहस चुनावी माहौल में तेज हो गई है।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि CRPF पूरे ऑपरेशन का समन्वय संभालेगी। विशेष ट्रेनों से जवानों को राज्य में लाया जा रहा है।